
परिचय:
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्पादन, वृद्धि, उपभोग और निर्यात के मामले में भारत के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में फल और सब्जियाँ, मसाले, मांस और मुर्गी पालन, दूध और दूध से बने उत्पाद, मादक पेय, मत्स्य पालन, रोपण, अनाज प्रसंस्करण और अन्य उपभोक्ता उत्पाद समूह जैसे कन्फेक्शनरी, चॉकलेट और कोको उत्पाद, सोया आधारित उत्पाद, खनिज जल (मिनरल वाटर), उच्च प्रोटीन वाले प्रसंस्कृत खाद्य आदि शामिल हैं। अगस्त 1991 में उदारीकरण के बाद से, खाद्य और कृषि-प्रसंस्करण उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा, सरकार ने संयुक्त उद्यमों, विदेशी सहयोग, औद्योगिक लाइसेंस और 100% निर्यात-उन्मुख इकाइयों के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है, जिनमें भारी निवेश की परिकल्पना की गई है।
भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने पिछले दशक में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण का प्रदर्शन किया है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक, इस क्षेत्र को कुल 13.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ। विशेष रूप से, अकेले 2014 और 2024 के बीच की अवधि में लगभग 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई इक्विटी अंतर्वाह हुआ, जो इन वर्षों के दौरान सुदृढ़ विकास पथ को दर्शाता है।
इस सुदृढ़ निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका को बल मिलता है। वर्तमान में यह कुल खाद्य बाजार का 32% हिस्सा है और उत्पादन, उपभोग, निर्यात और अनुमानित वृद्धि के मामले में शीर्ष पांच क्षेत्रों में सम्मिलित है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में लगातार वृद्धि भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं और एक प्रमुख आर्थिक प्रेरक के रूप में इसकी क्षमता में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाती है।
निर्यात:
भारत के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात 2024-25 में 7,886.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो इस प्रकार है:
| उत्पाद | वित्त वर्ष 2025 में निर्यात (मिलियन अमरीकी डॉलर) |
| विविध निर्मित उत्पाद | 1476.71 |
| अनाज से निर्मित उत्पाद | 933.78 |
| प्रसंस्कृत सब्जियाँ | 897.07 |
| दालें | 854.96 |
| मूंगफली | 794.99 |
| प्रसंस्कृत फल, जूस और मेवे | 721.86 |
| ग्वारगम | 568.97 |
| गुड़ और कन्फेक्शनरी | 406.92 |
| मादक पेय | 353.17 |
| ककड़ी और खीरा(संरक्षित और तैयार) | 306.72 |
| कोको उत्पाद | 295.55 |
| मिल के उत्पाद | 192.2 |
| आम का गूदा | 80.4 |
| अन्य ऑयल केक/ठोस अवशिष्ट | 3.32 |
| स्त्रोत: वाणिज्यिक जानकारी एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) | |
भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मुख्य रूप से निर्यातोन्मुख है। भारत की भौगोलिक स्थिति इसे यूरोप, मध्य पूर्व, जापान, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और कोरिया से जुड़ने का अद्वितीय लाभ प्रदान करती है। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य व्यापार का मूल्य भारत की स्थानगत लाभ को दर्शाने वाला एक ऐसा उदाहरण है।
भारत सरकार ने निवेश को सुगम बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने, बौद्धिक संपदा की रक्षा करने और एक सुदृढ़ विनिर्माण अवसंरचना का निर्माण करने के उद्देश्य से शुरू की गई “मेक इन इंडिया” पहल के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को प्रमुखता दी है। सकल घरेलू उत्पाद, निर्यात, निवेश और रोजगार में योगदान के कारण खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है।











