अन्य अनाज

परिचय:
मोटे अनाज कई अल्प अवधि वाली और गर्म मौसम (खरीफ) की फसलों का एक व्यापक उप-समूह हैं, जिनमें ज्वार (सोरघम), बाजरा (पर्ल मिलेट), मक्का, रागी (फिंगर मिलेट) आदि शामिल हैं। इनका उपयोग भोजन, चारा, ईंधन, मूल्य वर्धित उत्पादों और फास्ट-फूड उत्पादों में किया जाता है।

हमारे देश में, मोटे अनाज मुख्य रूप से कम अनुकूल कृषि-जलवायु क्षेत्रों, विशेष रूप से देश के वर्षा आधारित क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। ये फसलें उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में उगाई जाती हैं और इन्हें ‘शुष्क भूमि की फसलें’ कहा जाता है क्योंकि इन्हें 50-100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता है। ये फसलें मिट्टी की कमियों के प्रति कम संवेदनशील होती हैं और इन्हें कम उपजाऊ जलोढ़ या दोमट मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।

इस उप-समूह के अंतर्गत वैयक्तिक उत्पाद निम्नलिखित हैं:

  • राई के बीज
  • जौ के बीज
  • जई के बीज
  • सोरघम
  • ज्वार
  • कुट्टू
  • बाजरा
  • रागी
  • कैनरी के बीज

भारत के तथ्य एवं आंकड़े: भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अनाज उत्पादों की अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। देश ने वर्ष 2024-25 के दौरान विश्व को 19,672.91 मीट्रिक टन अन्य अनाज (चावल, गेहूं, मक्का एवं श्री अन्न (मिलेट) को छोड़कर) का निर्यात किया जिसका मूल्य रु. 140.23 करोड़ / 16.54 अमेरिकी डॉलर मिलियन रहा।

प्रमुख निर्यात गंतव्य (2024-25): रूस, जापान, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, अमेरिका और वियतनाम।