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Organic Products

राष्ट्रीय जैविक उत्पाद कार्यक्रम (एन.पी.ओ.पी)


जैविक उत्पादों की खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के बिना, एक पर्यावरणात्मक और सामाजिक उत्तरदायी दृष्टिकोण के साथ की जाती है। यह एक ऐसी खेती है जिसमें कार्य की शुरूआत जड़ से होती है और इसमें मृदा की उर्वरा शक्ति उत्तम पादप पोषण और मृदा प्रबंधन मूल रुप से संरक्षित रहती है जिससे रोगों की प्रतिरोधक क्षमता वाले बेहतर पोषण पदार्थ उपजते हैं ।


भारत में विविध कृषि जलवायु क्षेत्रों के कारण विविध किस्मों के जैविक उत्पादों के उत्पादन की वृहत क्षमता उपलब्ध है ।देश के कई भागों में विरासत में मिली जैविक कृषि की परम्परा एक अतिरिक्त सुअवसर है । निर्यात बाज़ार की तीव्र बढ़ोतरी के फलस्वरुप देशीय बाज़ार में भी उत्तरोत्तर प्रगति हो रही है जो जैविक उत्पादकों के लिए अपने उत्पादों के निरंतर विक्रय के लिए आशाजनक संकेत है।


2018 के डाटा के अनुसार उपलब्ध आंकड़ों में, विश्व के जैविक कृषि योग्य भूमि के संबंध में भारत नवें स्थान पर है और उत्पादकों की कुल संख्या के संबंध में पहले स्थान पर है (स्त्रोतः एफ.आई.बी.एल और आई.एफ.ओ.ए.एम वार्षिक पुस्तिका 2018)।


भारत सरकार ने राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एन.पी.ओ.पी) कार्यान्वित किया है । इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रमाणीकरण निकायों के लिए प्रत्यायन कार्यक्रम, जैविक उत्पादन के लिए मानदण्ड, जैविक खेती आदि को बढ़ावा देना शामिल किया है। अप्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के लिए उत्पादन और प्रत्यायन प्रणाली हेतु राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के मानकों को यूरोपीय आयोग और स्विटज़रलैंड ने अपने देश के मानकों के समकक्ष माना है। इसी प्रकार यू.एस.डी.ए ने राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के प्रत्यायन की मूल्यांकन क्रियाविधि को यू.एस की क्रियाविधि के अनुरुप माना है । इन अभिनिर्धारणों के साथ भारतीय प्रत्यायन प्रमाणीकरण निकायों द्वारा यथा प्रमाणित भारतीय जैविक उत्पादन आयातित देशों द्वारा स्वीकार किए जाते हैं ।



क्षेत्र :-

31 मार्च, 2018 से जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया (राष्ट्रीय जैविक उत्पाद कार्यक्रम) के अंतर्गत कुल क्षेत्र 3.56 मिलियन हैक्टेयर (2017-18) है। इसमें 1.78 मिलियन हैक्टैयर (50%) खेती योग्य क्षेत्र और 1.78 मिलियन हैक्टैयर (50%) जंगली फसल संग्रह शामिल है।


सभी राज्यों में, जैविक प्रमाणीकरण के अधीन सबसे अधिक क्षेत्र मध्य प्रदेश में है जिसके बाद राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश है।


2016 के दौरान, सिक्किम ने जैविक प्रमाणीकरण के तहत अपनी पूरी खेती योग्य भूमि (76000 हैक्टेयर भूमि से अधिक) को बदलने की उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है।


उत्पादन :-

भारत द्वारा प्रमाणित जैविक उत्पादों का लगभाग 1.70 मिलियन मीट्रिक टन (2017-18) उत्पादन किया गया जिसमें खाद्य उत्पादों जैसे कि तिलहन, गन्ना, अनाज और बाजरा, कपास, दालें, औषधीय पौधे, चाय, फल, मसाले, मेवे (ड्राईफ्रूट्स), सब्ज़ियां, कॉफी आदि शामिल हैं। यह उत्पादन केवल खाद्य उत्पादों तक ही सीमित नहीं है अपितु जैविक कपास फाइबर, प्रयोजनमूलक खाद्य उत्पाद आदि का भी उत्पादन किया जा रहा है।


विभिन्न राज्यों में, जैविक प्रमाणीकरण के अधीन सबसे अधिक क्षेत्र मध्य प्रदेश में है जिसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और राजस्थान है। कमोडिटीज़ के मामले में तिलहन के बाद चीनी फसलों, अनाज और मिलेट, फाइबर फसलों, दालें, औषधीय, हर्बल और सुगंधित पौधों और मसालों और चटनी सबसे बड़ी श्रेणी हैं।


निर्यात :-

2017-18 के दौरान कुल निर्यात मात्रा 4.58 लाख मीट्रिक टन थी। जैविक खाद्य निर्यात विक्रय 3453.48 करोड़ रुपए (515.44 मिलियन यू.एस. डॉलर) थे। जैविक उत्पाद संयुक्त राज्य अमरीका, यूरोपीय संघ, कनाडा, स्विटज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, दक्षिणी कोरिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, जापान आदि देशों को निर्यात किए गए।


निर्यात मूल्य प्राप्ति के संदर्भ में तिलहन (47.6%) सबसे आगे है जिसके बाद अनाज और बाजरा (10.4%), बागान फसल उत्पाद जैसे चाय और कॉफी (8.96%), मेवे (ड्राईफ्रूट्स) (8.88%%) मसाले और चटनी (7.76%) और अन्य हैं।